27 साल बाद हुए टिड्डियों ने भारत में सबसे अधिक संख्या में हमला किया है और फसलों को चौपट कर दिया है। पहली बार ये टिड्डियाँ शहरों तक पहुंच गई। ये टिड्डियाँ पाकिस्तान से आती है और वहां के किसान पहले से ही इनसे बहुत ज्यादा परेशान थे। पाकिस्तानी किसानों ने इस आफत को भी नुकसान की जगह मोटी कमाई का जरिया बना लिया है। आज हम आपको बतांएगे कि किसान कैसे टिड्डियों से मोटी कमाई कर रहे हैं।

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ये निकाला समाधान
पाकिस्तान के ओकरा जिले में टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए एक बहुत ही नए तरह का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों को टिड्डियों को पकड़ना होता है, जिसका इस्तेमाल मुर्गियों के चारे के रूप में किया जा रहा है। मुर्गियों का चारा बनाने वाली मिलों में इन टिड्डियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

पहले उड़ा मजाक, अब हो रही वाहवाही
ये विचार नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड रिसर्च में नौकरशाह मोहम्मद खुर्शीद और पाकिस्तान एग्रीकल्चर रिसर्च काउंसिल के बायोटेक्नोलॉजिस्ट जौहर अली के दिमाग में आया। पहले लोगों ने उनका बेहद मजाक उड़ाया था लेकिन अब सब उनकी तारीफ़ कर रहे हैं।

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'टिड्डियों को पकड़ो, पैसे कमाओ, फसल बचाओ'
पाकिस्तानी किसानों को 1 किलो टिड्डी पकड़ने पर 20 रुपये (0.12 अमिरेकी डॉलर) का ऑफर दिया गया। ये दिन में उड़ती है और रात में मृत की तरह पड़ी रहती है। इसलिए रात में उन्हें पकड़ना बहुत ही आसान होता है। एक किसान ने इतनी टिड्डियाँ पकड़ ली कि उसे एक ही रात में पाकिस्तानी 20,000 रुपये (125 अमेरिकी डॉलर) तक मिलने शुरू हो गए।


बहुत ज्यादा प्रोटीन की मौजूदगी
पाकिस्तान में पोल्ट्री ब्रीडर्स और जानवरों का चारा बनाने वाली कंपनियों ने कुछ हफ्तों तक ब्रॉयलर चिकन पर टिड्डियों वाले चारे के प्रभाव का आंकलन किया था। इनमे काफी प्रोटीन होता है। इन्हें खाने के लिए तैयार करने में भी ज्यादा खर्च नहीं करना होता, क्योंकि इन्हें सिर्फ पकड़कर सुखाना होता है। जबकि पहले जिस प्रोटीन का इस्तेमाल करना होता था वो बेहद महंगा पड़ता था।


लोगों को मिला रोजगार का जरिया
अब पायलट प्रोजेक्ट के तहत बहुत से लोगों को रोजगार मिला है; जहाँ एक तरफ कोरोना काल में लोगों का रोजगार खत्म हो गया था वहीं अब किसान इस से मोटी कमाई कर रहे हैं।

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