असम सरकार का बड़ा फैसला: 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन से कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत

असम सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में एक ऐतिहासिक और अहम निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 8वें राज्य वेतन आयोग (8th State Pay Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े मामलों में बड़े सुधार की उम्मीद की जा रही है। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के बीच सरकार का यह कदम लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है।

राज्य सरकार के अनुसार, नया वेतन आयोग मौजूदा वेतन संरचना, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों की व्यापक समीक्षा करेगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के कल्याण और राज्य की वित्तीय व प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है।

अनुभवी अधिकारी को सौंपी गई जिम्मेदारी

8वें राज्य वेतन आयोग की जिम्मेदारी पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष दास को सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में आयोग वेतनमान की विसंगतियों, पुराने ढांचे और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का गहन अध्ययन करेगा। प्रशासनिक अनुभव के चलते उनसे संतुलित और व्यावहारिक सिफारिशों की उम्मीद की जा रही है।

आयोग केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेंशनभोगियों के हितों को भी विशेष प्राथमिकता देगा।

वेतन ढांचे और भत्तों की होगी समीक्षा

नए वेतन आयोग का प्रमुख फोकस वेतन संरचना को सरल और पारदर्शी बनाना होगा। समय के साथ कई संशोधनों के कारण वेतनमान जटिल हो गया है। आयोग से उम्मीद की जा रही है कि वह वेतन स्लैब को आसान बनाएगा और पुरानी विसंगतियों को दूर करेगा।

इसके अलावा, मकान, यात्रा, चिकित्सा और अन्य आवश्यकताओं से जुड़े भत्तों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि वे मौजूदा महंगाई के अनुरूप हों।

पेंशनभोगियों को भी मिलेगा लाभ

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी यह आयोग राहत लेकर आ सकता है। पेंशन गणना, महंगाई राहत और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सिफारिशें पेंशनभोगियों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं।

केंद्रीय वेतन आयोग से तालमेल की कोशिश

आयोग का एक अहम लक्ष्य राज्य की वेतन संरचना को, जहां संभव हो, केंद्र सरकार के वेतन मानकों के करीब लाना भी होगा। इससे कर्मचारियों को समय पर और संतुलित वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता है।

कर्मचारियों का मनोबल और प्रशासनिक मजबूती

8वें राज्य वेतन आयोग के गठन से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार की उम्मीद है। बेहतर वेतन और पेंशन व्यवस्था से कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों मजबूत होती हैं।

आयोग की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार उस पर निर्णय लेगी। यदि सिफारिशें लागू होती हैं, तो यह असम में सरकारी कर्मचारी कल्याण के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है।