Customer Care के नाम पर हो रही ठगी से सावधान! ये 2 ऐप डाउनलोड करते ही स्कैमर्स ले लेते हैं फोन का कंट्रोल
- bySagar
- 21 Feb, 2026
आज के डिजिटल दौर में लोग छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए तुरंत इंटरनेट का सहारा लेते हैं। बैंक ट्रांजैक्शन अटक जाए, ऑनलाइन शॉपिंग का रिफंड न आए या किसी सर्विस में दिक्कत हो—ज्यादातर लोग सबसे पहले गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करते हैं। लेकिन यही जल्दबाजी कई बार भारी पड़ सकती है। साइबर अपराधी अब नए तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए मिनटों में बैंक खाते खाली कर रहे हैं।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि ठग कौन-सी ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे कैसे लोगों को फंसाते हैं और आप खुद को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं।
ये 2 ऐप्स जिनका नाम लेकर ठगी हो रही है
साइबर ठग अक्सर लोगों को AnyDesk और TeamViewer डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये ऐप्स खुद में खतरनाक या वायरस नहीं हैं। ये वैध रिमोट-एक्सेस टूल्स हैं जिनका उपयोग आईटी सपोर्ट, टेक्निकल सहायता और ऑफिस वर्क में किया जाता है।
समस्या तब शुरू होती है जब स्कैमर्स इनका गलत इस्तेमाल करते हैं।
कैसे होता है पूरा फ्रॉड?
- आप किसी समस्या के समाधान के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं।
- ठग नकली वेबसाइट या लिस्टिंग में अपना नंबर डाल देते हैं।
- आप कॉल करते हैं तो सामने वाला खुद को बैंक या कंपनी का अधिकारी बताता है।
- वह “समस्या ठीक करने” के नाम पर आपको ऐप डाउनलोड करने को कहता है।
- ऐप इंस्टॉल होते ही वह आपसे एक एक्सेस कोड मांगता है।
- कोड डालते ही आपके फोन की स्क्रीन और कंट्रोल स्कैमर के पास पहुंच जाता है।
एक बार एक्सेस मिलते ही अपराधी आपकी स्क्रीन पर हो रही हर गतिविधि देख सकते हैं—चाहे आप बैंक ऐप खोलें, OTP डालें या UPI PIN दर्ज करें। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर वे आपके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
सबसे बड़ा खतरा कहाँ होता है?
जब कोई यूजर स्क्रीन शेयरिंग के दौरान बैंकिंग ऐप या डिजिटल वॉलेट खोलता है, तो पासवर्ड, OTP और PIN जैसी संवेदनशील जानकारी सीधे स्कैमर को दिख जाती है। कई मामलों में अपराधी आपके फोन पर आने वाले SMS भी पढ़ लेते हैं और कुछ ही सेकंड में ट्रांजैक्शन कर देते हैं।
ऐसे बचें इस नए साइबर फ्रॉड से
- हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही कस्टमर केयर नंबर लें।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें।
- कभी भी किसी को एक्सेस कोड, OTP या PIN साझा न करें।
- बैंक या सरकारी संस्था कभी फोन पर पासवर्ड नहीं मांगती।
- अगर शक हो, तुरंत कॉल काटें और संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
याद रखने वाली जरूरी बात
रिमोट-एक्सेस ऐप्स खुद में सुरक्षित टूल हैं, लेकिन गलत हाथों में पड़ते ही ये साइबर अपराध का हथियार बन जाते हैं। इसलिए जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अगर कोई “कस्टमर केयर एजेंट” आपको ऐप डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयर करने को कहे, तो समझ लें कि मामला संदिग्ध हो सकता है।
निष्कर्ष:
ऑनलाइन सुविधा जितनी आसान हुई है, साइबर ठगी के तरीके भी उतने ही एडवांस हो गए हैं। सतर्कता और सही जानकारी ही आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी जरूरत, स्रोत और सुरक्षा की पुष्टि जरूर करें।






