Budget 2026 में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत: नए शहरों में पुराने टैक्स सिस्टम पर HRA छूट बढ़ाने का प्रस्ताव

Budget 2026 के तहत पुराने टैक्स सिस्टम को अपनाने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सरकार ने Draft Income Tax Rules 2026 में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव का मकसद बढ़ती जीवन लागत को ध्यान में रखते हुए शहरी कर्मचारियों को अधिक टैक्स राहत देना है।

अब तक HRA पर 50% तक की अधिकतम टैक्स छूट केवल चार प्रमुख महानगरों — मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई — में रहने वाले करदाताओं को मिलती थी। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस विशेष श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यदि यह नियम लागू हो जाता है, तो इन शहरों में किराए के मकान में रहने वाले लाखों कर्मचारियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।

चार नए शहरों को मिल सकती है 50% HRA टैक्स छूट

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, इन चार नए शहरों में रहने वाले कर्मचारी पुराने टैक्स सिस्टम के तहत सैलरी के 50% तक HRA पर टैक्स छूट का दावा कर सकेंगे। वहीं, देश के अन्य शहरों में यह सीमा 40% ही बनी रहेगी।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देती है, तो ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इसका मतलब यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 से टैक्सपेयर्स को बढ़ी हुई छूट का लाभ मिल सकता है।

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि HRA पर टैक्स छूट केवल पुराने टैक्स सिस्टम में उपलब्ध है, जबकि नए टैक्स सिस्टम को अपनाने वाले करदाताओं को यह सुविधा नहीं मिलती।

HRA टैक्स छूट कैसे कैलकुलेट होती है?

HRA छूट की गणना तीन में से सबसे कम राशि के आधार पर की जाती है:

  1. कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक HRA
  2. किराया चुकाई गई राशि, जो बेसिक सैलरी के 10% से अधिक हो
  3. तय प्रतिशत — 50% (विशेष शहरों के लिए) या 40% (अन्य शहरों के लिए)

इस फॉर्मूले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि करदाता को वास्तविक किराया खर्च के अनुरूप टैक्स लाभ मिले।

नए नियमों से कितना टैक्स बचेगा? (उदाहरण सहित)

मान लीजिए कोई कर्मचारी बेंगलुरु में रहता है और उसकी सालाना सैलरी ₹15 लाख है। यदि प्रस्तावित नियम लागू हो जाते हैं, तो उसे लगभग ₹18,700–₹20,000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत हो सकती है।

यह बचत सीधे इन-हैंड सैलरी को बढ़ाने में मदद करेगी और कर्मचारियों के लिए बढ़ती महंगाई के बीच राहत का काम करेगी।

पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम: किसे मिलेगा फायदा?

यह प्रस्ताव केवल पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वालों के लिए फायदेमंद है। नए टैक्स सिस्टम में पहले से ही कई कटौतियां हटाई गई हैं, जिनमें HRA छूट भी शामिल है।

पुराना टैक्स सिस्टम चुनने वाले वेतनभोगी लोगों के लिए यह अपडेट खासतौर पर लाभदायक हो सकता है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो बड़े शहरों में किराए के मकान में रहते हैं।

सरकार का उद्देश्य और संभावित असर

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शहरी इलाकों में बढ़ते किराए और जीवन-यापन की लागत को संतुलित करना है। बड़े आईटी हब और मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को इससे अधिक टैक्स राहत मिलेगी, जिससे उनकी खपत क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा करदाताओं के लिए बजट 2026 का सबसे बड़ा टैक्स बेनिफिट साबित हो सकता है।

Budget 2026 के तहत प्रस्तावित HRA नियमों में बदलाव पुराने टैक्स सिस्टम को अपनाने वालों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों में रहने वाले लाखों करदाता अधिक टैक्स छूट और बेहतर टेक-होम सैलरी का लाभ उठा सकेंगे।