US Politics ट्रंप को बड़ा झटका! ईरान युद्ध पर विपक्ष का प्रस्ताव संसद में पास; उसी पार्टी के MPs ने मोड़ा मुँह

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। ईरान पर ट्रंप के हमले के खिलाफ US कांग्रेस में एक प्रस्ताव पास हुआ है। यह प्रस्ताव ट्रंप को पार्लियामेंट की इजाज़त के बिना ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन लेने से रोकने के लिए लाया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के मेंबर ही इससे पीछे हट गए हैं।

रिपब्लिकन पार्टी में फूट?

US कांग्रेस में इस प्रस्ताव को 215 में से 208 वोट मिले। इसमें चार रिपब्लिकन मेंबर शामिल हैं। ईरान पर 28 फरवरी, 2026 को इजरायल के साथ मिलकर हमला किया गया था। ट्रंप ने इस हमले के लिए पार्लियामेंट की इजाज़त नहीं ली थी। इस युद्ध को तीन महीने बीत चुके हैं। अभी भी दोनों देशों में कई बातचीत के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।

इस प्रस्ताव के पक्ष में रिपब्लिकन में मिशिगन के टॉम बैरेट, ओहियो के वॉरेन डेविडसन, पेन्सिलवेनिया के ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक और केंटकी के थॉमस मैसी शामिल हैं। पार्लियामेंट के इन मेंबर ने युद्ध खत्म करने की मांग में डेमोक्रेट्स का साथ दिया है। फिलहाल, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सीनेट में भेजा गया है। हालांकि, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करते हैं, तो बिल का कानून बनना नामुमकिन है।

ईरान युद्ध से अमेरिका को बड़ा झटका लगेगा
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को शनिवार को 100 दिन पूरे हो गए। अमेरिका ने इस युद्ध पर बहुत ज़्यादा पैसा खर्च किया है। पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग $29 बिलियन खर्च हो चुके हैं। अगर यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा, तो इसमें $1 ट्रिलियन तक का खर्च आने की संभावना है।

इसके अलावा, इस युद्ध की वजह से अब तक 3,400 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। इस युद्ध से ग्लोबल लेवल पर भी भारी नुकसान हो रहा है। तनाव की वजह से होर्मुज का अहम ट्रेड रूट बंद होने से इंटरनेशनल मार्केट में तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आई है। जिसकी वजह से फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

शांति वार्ता फेल
दावा किया जा रहा है कि पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे शांति वार्ता चल रही है। लेकिन अभी तक कोई पक्का फैसला नहीं हुआ है। इस वजह से युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में विपक्ष का प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।