Mahabharata Story: महाभारत में कर्ण ने अर्जुन को मारने की कसम क्यों खाई थी? जानें

महाभारत का युद्ध सिर्फ़ हथियारों की लड़ाई नहीं थी, यह रिश्तों, अहंकार, बदले और नेकी की भी लड़ाई थी। इस युद्ध में कई योद्धा थे, जिनकी कहानियाँ आज भी हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। उनमें से एक थे दरियादिल कर्ण। कर्ण और अर्जुन के बीच की लड़ाई महाभारत की सबसे मशहूर घटनाओं में से एक मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कर्ण ने अर्जुन को मारने की कसम क्यों खाई थी? जानिए क्या हुआ इसके पीछे की वजहें

जन्म से ही झगड़ों से घिरा था कर्ण
कर्ण का जन्म कुंती और सूर्य देव के आशीर्वाद से हुआ था। लेकिन, समाज की बदनामी के डर से कुंती ने नए जन्मे कर्ण को एक टोकरी में रखकर नदी में छोड़ दिया। बाद में अधिरथ और राधा ने उनका पालन-पोषण किया। सूत का पुत्र कहलाने की वजह से कर्ण को बचपन से ही बेइज्जती और भेदभाव का सामना करना पड़ा। हालाँकि कर्ण बहुत टैलेंटेड और एक महान धनुर्धर था, लेकिन उसके जन्म की वजह से समाज उसे नीची नज़र से देखता था। इन सभी बातों से उसके मन में बहुत गुस्सा पैदा हुआ।

गुरु द्रोण की सभा में बेइज्जती
महाभारत के अनुसार, जब गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्यों से युद्ध की कला का प्रदर्शन करवा रहे थे, तो अर्जुन ने अपनी असाधारण तीरंदाजी से सबको इम्प्रेस कर दिया। तब कर्ण ने अर्जुन को चुनौती देते हुए दावा किया कि वह भी ऐसा कर सकता है। इसी बीच, कर्ण की जाति और पहचान पर सवाल उठाए गए। उसे सारथी का बेटा कहे जाने के कारण प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से मना कर दिया गया। इस बेइज्जती ने अर्जुन के प्रति कर्ण की दुश्मनी और गुस्सा बढ़ा दिया।

कर्ण अर्जुन का सबसे बड़ा दुश्मन है
कर्ण और अर्जुन दोनों ही महान तीरंदाज थे। दोनों के पास दिव्य हथियार थे और युद्ध कौशल में उनका कोई मुकाबला नहीं माना जाता था। कर्ण हमेशा यह साबित करना चाहता था कि वह अर्जुन से कम नहीं है। कई कहानियों में कहा जाता है कि कर्ण ने युद्ध में अर्जुन को हराकर अपनी बेइज्जती का बदला लेने की कसम खाई थी। इसीलिए कर्ण और अर्जुन के बीच की लड़ाई को महाभारत की सबसे रोमांचक और निर्णायक लड़ाई माना जाता है। 

कुंती ने मांगा था वचन
महाभारत युद्ध से पहले, मां कुंती ने कर्ण को सच बताया था कि वह उनका सबसे बड़ा बेटा है और पांडव उसके भाई हैं। कुंती ने उसे पांडवों का साथ देने के लिए कहा, लेकिन कर्ण दुर्योधन का वफादार रहा। इस बीच, उसने कुंती से वादा किया कि वह अर्जुन के अलावा किसी और पांडव को नहीं मारेगा। इससे यह साफ है कि अर्जुन उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा टारगेट और दुश्मन बन गया था।

कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध को खास क्यों माना जाता है
महाभारत में कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध सिर्फ दो योद्धाओं के बीच का युद्ध नहीं था। यह सम्मान, बदला, दोस्ती और किस्मत की लड़ाई थी। एक तरफ अर्जुन थे, जिन्हें सबसे अच्छा धनुर्धर माना जाता था, तो दूसरी तरफ कर्ण थे, जिन्होंने मुश्किल हालात में भी खुद को एक महान योद्धा साबित किया था। इसीलिए आज भी कर्ण और अर्जुन के बीच की दुश्मनी महाभारत की सबसे मशहूर घटनाओं में से एक के तौर पर जानी जाती है।